OSHO Ateet Aur Bhavishya Se Mukti

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OSHO International Foundation presents :

Ateet Aur Bhavishya Se Mukt
संबोधि का अर्थ होता है: जो है, उसमें जीना; जो है, उसे देखना; जो है, उससे जुड़ जाना। जो नहीं है, उस पर पकड़ छोड़ देना।… अतीत नहीं है, नहीं हो चुका; भविष्य नहीं है, अभी हुआ ही नहीं–इन दो नहीं के बीच जो है, वर्तमान का छोटा सा क्षण, वह दबा जा रहा है। इन दो चक्कियों के बीच में तुम्हारा अस्तित्व पिसा जा रहा है।… अतीत से और भविष्य से जो मुक्त हो गया, वह संबुद्ध है, वह बोधि को उपलब्ध हुआ।

ओशो के 2500 से अधिक मूल हिंदी प्रवचनों की ऑडिओ रिकॉर्डिंग उपलब्ध है। वीडिओ के रूप में केवल बहुत थोड़े से हिंदी प्रवचन रिकॉर्ड किए गए थे।

2,500 original OSHO TALKS are available as audio recordings in Hindi language while only a small number of his Hindi talks have been recorded in video format.

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एक नई अनुवाद प्रौद्योगिकी अब उपशीर्षक के माध्यम से ओशो की हिंदी भाषा को कई अन्य भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में अनुवाद करने की सुविधा देता है। हम यहां जल्द ही जो जानकारी उपलब्ध कराएंगे उसका अनुसरण करें

A new translation technology allows now to translate Osho’s Hindi language through subtitles into many other Indian and international languages. Follow the details we will make available here soon.

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33 COMMENTS

  1. Hai bhagwan !!!!!! Sambodhi ka matlab yeh nahi hota hai, jo osho g ne bataya hai…..balki sambodhi ka sidha sidha matlab hai ki jese atma ka koi rang roop rekh nahi hota vese hi aap jis chij ko dekhe to atma hi dikhe ye hota hai sambodhi……par ase dikhta kiyo nahi hai ?? Kiyo ki vasna, soch, kamana, mai, maya me lipt hai,

  2. ज्ञान गया पानी पीने
    पर सिकन्दर महान कैसे और किन कारणों से हुआ ये
    समझ नही आया
    मैं किसी धर्म को नही मानता पर अधर्म के समर्थन में भी नही हूँ।
    मैं समझता हूँ सांस प्रकृति की देंन है।
    जिसको आ रही है। ये उसको ही पता है।
    जिसकी बन्द हो गई
    उसको क्या पूछें।
    तो……..

  3. param gati ki awastha me insan sakshi hai, parmatma ka prakash parta rehta hai, insan ka samarpan hai, ab bhagwan jivan chala raha hai, atit or vhabisya ki chinta se mukti, koi dar nahi, har kan kan chan me uska sath uski anubhuti, ab dar kahan ab to sukun or param anand … ab param mukti,

  4. प्रणाम आचार्य श्री ओशो

    ऊं श्रीं

    धन्यवाद

    आपका अपना दयाल सिंह चुण्डावत राजपूत मानियास

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